अफगान सेना के अमेरिकी हथियार आखिर अब किसके कब्जे में हैं?

संजीव पांडेय

संजीव पांडेय

अगर अफगान सेना के अमेरिकी हथियार तालिबान के हाथ लग गए तो वैश्विक शक्तियों के सामने एक और बड़ी चुनौती सामने आएगी।

क्या अमेरिकी हथियार तालिबान के हाथ लग गए हैं? बात उन अमेरिकी हथियारों की हो रही है, जो अमेरिकी प्रशसान ने अफगान नेशनल आर्मी को उपलब्ध करवायी थी। हालांकि अमेरिका ने फिलहाल इस पर चुप्पी साध रखी है। दरअसल अफगान आर्मी के सरेंडर के बाद उनके पास के हथियार कहां गए, यही सवाल खड़े हो रहे हैं।

अमेरिकीदरअसल फिलहाल अमेरिका तो काबुल हवाईअड्डे से उन अफगान लोगों को निकालने में व्यस्त है, जिन्होंने अमेरिकी सेना के साथ अफगानिस्तान में तालिबान से लड़ाई लड़ी। इसलिए निश्चित तौर पर वे सारे हथियार अफगानिस्तान में ही हैं, जो अमेरिका ने अफगान नेशनल आर्मी को दी थी।

एक शक यह भी जताया जा रहा है कि अफगान नेशनल आर्मी के हथियार अगर तालिबान के हाथ लग गए तो इसमें अमेरिकी सहमति होगी।

अमेरिका एक रणनीति के तहत अफगान तालिबान को रक्षा मामले में अमेरिका पर निर्भर बनाने की रणनीति में हो?

वैसे रूस के रक्षा विभाग से जुड़े के एक सीनियर अधिकारी ने आशंका जतायी है कि अमेरिकी सेना दवारा अफगानिस्तान में उपलब्ध करवाए गए 150 मिसाइल अफगान तालिबान के हाथ लग सकते हैं। दूसरी तरफ अफगान तालिबान अपना स्पेशल फोर्स बनाने का दावा कर रहा है। उनका वीडियो जारी किया है जिसमें अमेरिकी सैन्य हथियारों और उपकरणों से लैस तालिबान के लड़ाके नजर आ रहे हैं। उनका परंपरागत ड्रेस सलवार-कुर्ता नजर नहीं आ रहा है।

अमेरिकी

चंद दिनों में ही अफगान तालिबान के सामने अफगान सेना सरेंडर कर गई थी। अमेरिकी प्रशासन ने अफगान सेना को लगभग 100 अरब डालर की मदद देकर खड़ा किया था। अमेरिकी मदद से ख़ड़ी की गई अफगान सेना का एकाएक सरेंडर ही अमेरिकी रणनीति पर सवाल खड़ा कर रहा है। अरबों डालर के हथियार भी कहां गए, इस पर अमेरिका फिलहाल चुप है।

अमेरिका ने अफगान सेना को जमकर हथिय़ार उपलब्ध करवाए थे। अब अहम सवाल यह है कि अफगान सेना के पास मौजूद हथियार अगर तालिबान के हाथ लगे तो तालिबान की सैन्य ताकत और बढ़ जाएगी। उसे तो सारा कुछ बना-बनाया मिल गया? तालिबान को अफगानिस्तान में बना-बनाया रोड, बिल्डिंग मिल गए हैं।

अब अगर हथियार भी मुफ्त का मिल गया तो खेल के पीछे कई खेल हैं।

आखिर अमेरिकी प्रशासन यह बताने में असमर्थ क्यों है कि जो हथियार अमेरिका ने अफगान सेना को उपलब्ध करवाया था, वो हथियार अब कहां हैं?

वैसे तो तालिबान को लंबे समय से पाकिस्तान हथियारों की आपूर्ति करता है। पिछले तीन-चार सालों में ईऱान भी तालिबान को हथियार दे रहा है। किसी जमाने में तालिबान का धूर विरोधी ईरान ने अपनी रणनीति को बदल तालिबान को हथियारों की मदद कर रहा है। पाकिस्तान तो 1990 के दशक से तालिबान को हथियार मुहैया कराता रहा है।

वैसे तालिबान की सैन्य ताकत का अंदाजा लगाने वाले रिसर्चर्रों का अनुमान है कि तालिबान के पास 2 लड़ाकू विमान, 24 हेलिकाप्टर, 12 टैंक, 51 आर्मड फाइटिंग व्हिकल, 61 आर्तलरी, 1980 ट्रक, जीप समेत कई और सैन्य वाहन हैं। लेकिन अगर अमेरिकी हथियार तालिबान के हाथ लग गए तो तालिबान की सैन्य क्षमता और बढ़ जाएगी।

क्योंकि पिछले 15 सालों में अफगान सेना को खासा हथियार अमेरिका ने उपलब्ध करवाए हैं। यूएस गर्वनमेंट एकाउँटिबिलिटी ऑफिस, अमेरिका स्पेशल इंसपेक्टर जनरल फॉर अफगान रिकंस्ट्रक्शन और रॉयटर्स ने अफगान सेना को दिए गए हथियारो का डिटेल समय-समय पर दुनिया के सामने रखा है।

अमेरिका ने अफगान सेना को 6 लाख इन्फ्रैंट्री हथियार उपलब्ध करवाए। इसमें रायफल और गन शामिल हैं। वहीं 1 लाख 62 हजार संचार उपकरण भी उपलब्ध करवाए। अफगान सेना को 16 हजार नाइट विजन गोगल्स भी उपलब्ध करवाए गए थे। अमेरिका ने अफगान सेना को 20 हजार ग्रेनेड और 75 हजार व्हिकल अफगान सेना को उपलब्ध करवाया था।

अफगान सेना की हवाई क्षमता को भी अमेरिका ने मजबूत करने की कोशिश की। हालांकि अफगान एयरफोर्स तकनीकी रूप से हथियार बनाने वाले अमेरिकी कंपनियों निर्भर था, जो अफगान एयरफोर्स को तमाम तकनीकी सहयोग दे रहे थे। अमेरिकी फौजों की वापसी की समय सीमा घोषित होने के बाद अफगान सेना को तकनीकी सहयोग देने वाली कंपनियों ने भी अफगानिस्तान पिछले कुछ महीनें में छोड़ दिया था।

युद्ध

यही कारण था कि अफगान तालिबान से अफगान सेना का युद जब चरम पर पहुंचा तो अफगान एयरफोर्स पूरी तरह विफल साबित हुआ। वैसे अमेरिका ने अफगान सेना को 167 उपयोग लायक एयरक्राफ्ट उपलब्ध करवाया था।

इसमें 23 ए-19 एयरक्राफ्ट, 10 एसी-208 एयरक्राफ्ट, 23 सी-208 एयरक्राफ्ट, 3 सी-130 एयरक्राफ्ट, 32 एमआई-17 हेलिकॉप्टर, 43 एमडी-530 हेलिकॉप्टर, 33 यूएच-60 ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर शामिल हैं।

अमेरिका का आरोप है कि अफगान सेना के अधिकार पैसे बनाने में लगे हुए थे। अगर तालिबान से अफगान सेना की हार हुई तो इसके लिए अमेरिका नहीं, बल्कि अफगान सेना जिम्मेवार है। अफगान सेना में भ्रष्टाचार शुरू से ही देखा गया। बड़ी संख्या मे हथियार गायब हुए। शायद इन्हें अवैध तरीके से बेचा भी गया।

अफगान सेना के भ्रष्ट अधिकारियों के कारण बीते कुछ सालों में तालिबान भी अफगान सेना का हथियार हासिल करने में सफल रहा। 2013 में अमेरिकी स्पेशल इंसपेक्टर जनरल फॉर अफगान रिकंस्ट्रक्शन ने बताया अफगान सेना को दिए गए 4 लाख 74 हजार फायर आर्मस में से 2 लाख 3 हजार फायर आर्मस का उस समय कोई हिसाब किताब नहीं मिला था।

अगर अफगान सेना के हथियार तालिबान के हाथ लग गए तो वैश्विक शक्तियों के सामने एक और बड़ी चुनौती सामने आएगी। लेकिन इस पूरे खेल में कई तरह के झोल हैं। कई सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी इस तरह का खेल जानबूझ करते हैं।

अफगान सेना को अमेरिका दवारा उपलब्ध करवाए गए हथियार कुछ साल ही चलेंगे। फिर इनकी मरम्मत की जरूरत होगी। मरम्मत और हथियारों से संबंधित उपकरण उन कंपनियों के पास है जिन्होंने इन हथियारों को बनाया है। अमेरिका इसी बहाने तालिबान में को नियंत्रित करता रहेगा। क्योंकि मुफ्त में दुनिया का कोई देश हथियार या उससे जुड़े हुए उपकरण तालिबान को देगा नहीं। इसका लाभ अमेरिका निश्चित तौर पर लेगा।

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संजीव पांडेय वरिष्ठ पत्रकार और अंतराष्ट्रीय मुद्दों पर पकड़ रखने वाले लेखक हैं।

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